सनातन संस्कृति और संगीत शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित।

सनातन संस्कृति और भारतीय संगीत परंपरा के संरक्षण एवं प्रसार के लिए समर्पित। निःशुल्क संगीत शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी में संस्कार और कला का विकास।

अपनी कर बचत को बच्चों की शिक्षा में लगाएं।

अपनी कर बचत को बच्चों की शिक्षा में लगाना एक समझदारी भरा और दूरदर्शी कदम है। शिक्षा ही वह आधार है जो बच्चों को बेहतर भविष्य और नई संभावनाओं की ओर ले जाता है। यदि हम अपनी बचत का एक हिस्सा उनकी पढ़ाई और ज्ञान बढ़ाने में निवेश करते हैं, तो यह न केवल उनके सपनों को साकार करने में मदद करता है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम भी बनाता है। आज किया गया यह छोटा सा निवेश आने वाले समय में बड़े बदलाव ला सकता है। बच्चों की शिक्षा में किया गया योगदान वास्तव में समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।

आपकी बचत को बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य से जोड़ने का प्रयास।

भारतीय शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत की शिक्षा को बढ़ावा देना।

भारतीय शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका संरक्षण और प्रसार करना हमारी जिम्मेदारी है। इस पहल के माध्यम से हम नई पीढ़ी को संगीत की परंपरा से जोड़ने और उन्हें इसकी गहरी समझ देने का प्रयास करते हैं।

प्रतिभाशाली लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को संगीत सीखने का अवसर देना।

समाज में कई ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे हैं जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपनी कला को आगे नहीं बढ़ा पाते। हमारा उद्देश्य ऐसे बच्चों को निःशुल्क या सुलभ संगीत शिक्षा प्रदान करना है। इससे उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने और अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिलता है।

संगीत के माध्यम से व्यक्तित्व विकास, अनुशासन और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना।

संगीत केवल एक कला नहीं बल्कि जीवन को संवारने का माध्यम भी है। यह बच्चों में अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास को विकसित करता है। साथ ही संगीत रचनात्मक सोच को बढ़ावा देकर उनके संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

20+

निःशुल्क संगीत कार्यशालाएँ

20+

मुफ्त शिक्षा

10+

संगीत एवं भजन प्रवाह

50+

स्वयंसेवक

सनातन नाद ट्रस्ट के संगीत कार्यक्रमों की नवीनतम झलकियाँ!

शनिवार 14 मार्च 2026 को मानसरोवर, जयपुर में सुंदर कांड पाठ का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य सनातन धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करना और समाज में भक्ति व सकारात्मकता का प्रसार करना था। अंत में सभी भक्तों के लिए प्रसाद वितरण भी किया गया।
होरी के पावन अवसर पर प्रियादासी महाराज की रचना “होरी का पद” को राग काफ़ी में प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में विद्यार्थियों ने भावपूर्ण गायन और संगीत का सुंदर प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक होरी गायन की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया गया।

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