Sanatan Naad Trust

We will be live soon, right now working in progress…

Thank you

भारतीय शास्त्रीय संगीत में ऋतुओं और त्योहारों का विशेष महत्व रहा है। विशेष रूप से होली के अवसर पर गाए जाने वाले होरी पद भारतीय संगीत और भक्ति परंपरा की सुंदर अभिव्यक्ति माने जाते हैं। इन्हीं परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए प्रियादासी महाराज की रचना “होरी का पद” को राग काफ़ी में विद्यार्थियों के साथ प्रस्तुत किया गया।

राग काफ़ी को होली के गीतों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इस राग की मधुरता और सहज भाव होली के उत्सव, प्रेम और आनंद को जीवंत कर देते हैं। विद्यार्थियों ने अपने गुरु के मार्गदर्शन में इस पद का अभ्यास किया और सामूहिक रूप से इसे बड़े भाव और समर्पण के साथ प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में संगीत की शुद्धता के साथ-साथ भक्ति और उत्साह का सुंदर संगम देखने को मिला।

इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ केवल संगीत का प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनती हैं। विद्यार्थियों को शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ हमारी पारंपरिक रचनाओं और उत्सवों की गहराई को समझने का अवसर मिलता है।

ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि बढ़ती है और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की प्रेरणा मिलती है। संगीत की यह साधना न केवल कला का विकास करती है बल्कि मन को शांति और आनंद से भी भर देती है। 🎶🙏



Comments

One response to “होरी का पद : राग काफ़ी में विद्यार्थियों के साथ एक भावपूर्ण प्रस्तुति”
  1. A WordPress Commenter Avatar

    Hi, this is a comment.
    To get started with moderating, editing, and deleting comments, please visit the Comments screen in the dashboard.
    Commenter avatars come from Gravatar.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *